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प्रशासनिक तंत्र की ‘लकवाग्रस्त’ चुप्पी: लिटिल फ्लावर स्कूल के नाम पर हर्रैया में धर्मांतरण का खुला खेल?

बस्ती का 'लिटिल फ्लावर' या धर्मांतरण का पावर हाउस? आधी रात को प्रशासनिक पहरे में चर्च की छत! हर्रैया में 'मिशनरी' खेल: खाकी के साये में ढली चर्च की छत, सवालों के घेरे में एसडीएम और जिला प्रशासन।

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती की शांत फिजां में ‘धर्मांतरण’ का जहर? लिटिल फ्लावर स्कूल पर VHP का हल्ला बोल, सवालों के घेरे में बस्ती प्रशासन

विशेष रिपोर्ट: ब्यूरो बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

  • योगी राज में बस्ती प्रशासन की ‘धृतराष्ट्र’ नीति? शिक्षा की आड़ में ब्रेनवाश और धर्मांतरण का खुला खेल!
  • रात के अंधेरे में ‘इबादतगाह’ का निर्माण: आखिर लिटिल फ्लावर स्कूल पर क्यों मेहरबान है बस्ती प्रशासन?
  • IAS-PCS के संरक्षण में चल रहा धर्मांतरण का ‘दिशा’ गिरोह? वीएचपी के आरोपों से हड़कंप!
  • बुलडोजर वाली सरकार में रसूखदारों को छूट! हर्रैया में अवैध चर्च निर्माण पर मौन क्यों है अमला?
  • खतरे में ‘मनोरमा’ का अस्तित्व और हिंदू लड़कियों की आस्था: लिटिल फ्लावर स्कूल के काले कारनामों का पर्दाफाश!
  • सेवा की आड़ में षड्यंत्र! 15-18 साल की लड़कियों का ब्रेनवाश, क्या कर रहा है बस्ती का खुफ़िया विभाग?
  • सियासी शह पर ‘ईसाई मिशनरी’ का तांडव: हर्रैया में वीएचपी की चेतावनी, आर-पार की जंग का ऐलान!

बस्ती/हर्रैया। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जहाँ एक ओर धर्मांतरण विरोधी कानून को लेकर बेहद सख्त है, वहीं बस्ती जिले के हर्रैया तहसील से आई एक शिकायत ने पूरे शासन-प्रशासन की नींद उड़ा दी है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) के विभाग मंत्री विवेक कुमार सिंह ‘सोनू’ ने सीधे मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर हर्रैया स्थित ‘लिटिल फ्लावर स्कूल’ पर शिक्षा की आड़ में ईसाई मिशनरी गतिविधियों और अवैध धर्मांतरण का अड्डा चलाने का संगीन आरोप जड़ा है।

​इस मामले ने तब तूल पकड़ लिया जब यह आरोप सामने आया कि स्थानीय प्रशासन और नगर पंचायत के रसूखदार नेताओं ने रात के अंधेरे में नियमों को ताक पर रखकर चर्च का निर्माण पूरा करवाया।

रात का सन्नाटा और ‘खाकी’ का पहरा: साजिश या सहयोग?

​शिकायती पत्र के अनुसार, लिटिल फ्लावर स्कूल परिसर में एक नए चर्च का निर्माण किया जा रहा था। वीएचपी और स्थानीय हिंदू संगठनों के कड़े विरोध के बावजूद, प्रशासन ने निर्माण कार्य रोकने के बजाय कथित तौर पर उसे संरक्षण दिया। आरोप है कि हर्रैया एसडीएम, नगर पंचायत अध्यक्ष और जिला प्रशासन की मिलीभगत से रात के अंधेरे में चर्च की छत (स्लैब) ढलवाई गई।

क्षेत्रीय चर्चा है कि: “जब पूरा शहर सो रहा था, तब प्रशासनिक अमला एक विवादित निर्माण को पूर्ण कराने में क्यों जुटा था? क्या इसके पीछे किसी बड़े राजनीतिक दल का ‘वोट बैंक’ वाला इशारा था?”

‘दिशा’ एनजीओ: सेवा के नाम पर ‘सफेदपोश’ ब्रेनवाश?

​रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला खुलासा ‘दिशा’ नामक एनजीओ को लेकर किया गया है। आरोप है कि:

  1. ​स्कूल परिसर से संचालित यह एनजीओ ग्रामीण क्षेत्रों की 15 से 18 वर्ष की किशोरियों को चिन्हित करता है।
  2. ​उन्हें रोजगार और बेहतर भविष्य का प्रलोभन देकर स्कूल कैंपस बुलाया जाता है।
  3. ​वहां उन्हें ‘आश्रम’ जैसी व्यवस्था में रखकर उनका ‘ब्रेनवाश’ किया जाता है और धर्म परिवर्तन के लिए मानसिक दबाव बनाया जाता है।

​विहिप नेता का दावा है कि उनके पास इन गतिविधियों के पुख्ता वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं, जिसमें लड़कियों को बहलाते-फुसलाते रंगे हाथ पकड़ा गया है। इसके बावजूद पुलिस और जिला प्रशासन की ‘फाइल’ अभी तक ठंडी पड़ी है।

मनोरमा नदी का अस्तित्व खतरे में: कानून की धज्जियां

​विवाद सिर्फ धर्मांतरण तक सीमित नहीं है। यह स्कूल और इसके निर्माण कार्य पवित्र मनोरमा नदी के बिल्कुल निकट स्थित हैं। स्थानीय पर्यावरणविदों और हिंदू संगठनों का आरोप है कि:

  • ​नियमों को ताक पर रखकर नदी के कैचमेंट एरिया में निर्माण किया गया है।
  • ​स्कूल और चर्च का दूषित पानी व कचरा सीधे नदी में बहाया जा रहा है।
  • ​प्रशासन ने अभी तक एनजीटी (NGT) के मानकों की जांच करने की जहमत नहीं उठाई।

सियासी रसूख और प्रशासनिक ‘लकवा’

​विवेक कुमार सिंह ‘सोनू’ ने अपने पत्र में स्पष्ट तौर पर समाजवादी पार्टी के नेताओं और स्थानीय नगर पंचायत अध्यक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि सत्ता की धौंस और प्रशासनिक सांठगांठ के कारण अधिकारी शिकायतों को नजरअंदाज कर रहे हैं। आईजीआरएस (IGRS) पर की गई शिकायतों का भी कोई ठोस निस्तारण नहीं हुआ, जिससे कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है।

बस्ती प्रशासन से जनता के 5 कड़वे सवाल:

  1. रात में निर्माण क्यों? अगर निर्माण वैध था, तो दिन के उजाले के बजाय रात के अंधेरे और भारी पुलिस बल के साये में छत क्यों डाली गई?
  2. जांच से परहेज क्यों? धर्मांतरण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर वीडियो साक्ष्य होने के बावजूद एनजीओ ‘दिशा’ की जांच अब तक शुरू क्यों नहीं हुई?
  3. नक्शा पास या अवैध? क्या स्कूल परिसर के भीतर धार्मिक स्थल बनाने का नक्शा सक्षम अधिकारियों द्वारा स्वीकृत है?
  4. बुलडोजर शांत क्यों? अन्य मामलों में तत्काल कार्रवाई करने वाला प्रशासन इस विशेष ‘मिशनरी’ संस्थान के सामने नतमस्तक क्यों है?
  5. मुख्यमंत्री की अनदेखी? क्या जिले के अधिकारी मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी गई शिकायतों को रद्दी की टोकरी में डाल रहे हैं?

निष्कर्ष: हर्रैया का यह प्रकरण अब महज एक स्कूल का विवाद नहीं रहा, बल्कि यह एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो विहिप और अन्य हिंदू संगठन बड़े जनांदोलन की तैयारी में हैं। अब देखना यह है कि बस्ती मंडल का प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागता है या किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार करता है।

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